सुधा की अन्तर्आत्मा बोली कि मैं एक नारी हूं, ठान लूं तो कुछ भी कर सकती हूं।। सुधा की अन्तर्आत्मा बोली कि मैं एक नारी हूं, ठान लूं तो कुछ भी कर सकती हूं।।
नारी की उत्पत्ति समाज को बीज से वृक्ष ,वृक्ष से फल ,फल से बीज पुनः जीवन चक्र का आवागमन नारी की उत्पत्ति समाज को बीज से वृक्ष ,वृक्ष से फल ,फल से बीज पुनः जीवन चक्र का ...
धीरे-धीरे उनका स्वास्थ तेजी से बिगड़ने लगा और उनका अंतिम शब्द था "छपछप"। धीरे-धीरे उनका स्वास्थ तेजी से बिगड़ने लगा और उनका अंतिम शब्द था "छपछप"।
माँ ने मेरी भावना को समझा था, वे क्यूँ न समझतीं! माँ ने मेरी भावना को समझा था, वे क्यूँ न समझतीं!
दो राहें एक तुम तक जाती हैं एक तुमसे लौट कर आती है। दो हसरतें , एक तुम्हारे पास दो राहें एक तुम तक जाती हैं एक तुमसे लौट कर आती है। दो हसरतें , ...
मन में तरह-तरह के सवाल आने लगे और मासूम मन तलाक क्या है समझने लगे। मन में तरह-तरह के सवाल आने लगे और मासूम मन तलाक क्या है समझने लगे।